तुम वाराणसी की यात्रा पर हो और गंगा के किनारे कुछ शांतिपूर्ण पल बिताना चाहते हो? तो नमो घाट (namo ghat) तुम्हारे लिए परफेक्ट जगह है। ये वाराणसी का एक नया और आधुनिक घाट है, जो पुरानी काशी की आत्मा को समेटे हुए आधुनिक सुविधाओं से भरपूर है। गंगा नदी के तट पर बसा ये घाट अब शहर के 86 घाटों में से एक प्रमुख आकर्षण बन चुका है।
यहाँ की हवा में एक अलग ही सुकून मिलता है। भीड़भाड़ वाले दशाश्वमेध या अस्सी घाट से अलग, नमो घाट पर तुम्हें ज्यादा शांति और जगह मिलेगी। पर्यटक और स्थानीय लोग दोनों यहाँ आकर गंगा के दर्शन करते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और शाम को सूर्यास्त का नजारा देखते हैं। ये घाट वाराणसी की आध्यात्मिकता को आधुनिकता के साथ जोड़ता है, जो इसे खास बनाता है।
नमो घाट क्यों प्रसिद्ध है?
नमो घाट की प्रसिद्धि का मुख्य कारण इसकी भव्य नमस्ते मुद्रा वाली मूर्तियां हैं। तीन विशाल हाथ जोड़े हुए प्रतिमाएं यहाँ की पहचान हैं, जो शाम को रोशनी में चमकती हैं तो मन मोह लेती हैं। ये मूर्तियां स्वागत का प्रतीक हैं और गंगा मां को नमस्कार करती नजर आती हैं।

इसके अलावा, ये घाट पर्यटकों के लिए इसलिए पसंदीदा है क्योंकि यहाँ आधुनिक सुविधाएं हैं – पार्किंग, कैफेटेरिया, बच्चों का खेल क्षेत्र और साफ-सुथरे सीढ़ियां। गंगा की सफाई अभियान से जुड़ा होने के कारण भी ये खास है। तुम यहाँ परिवार के साथ आराम से घूम सकते हो, बिना पुराने घाटों वाली भीड़ के। कई लोग तो इसे वाराणसी का सबसे सुंदर और व्यवस्थित घाट मानते हैं।
नमो घाट का इतिहास
निर्माण और उद्घाटन
नमो घाट पहले खिड़किया घाट के नाम से जाना जाता था। इसका नवीनीकरण स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हुआ। नींव 2018 में रखी गई और पूरा प्रोजेक्ट कई चरणों में बना। हाल ही में 2024 में देव दीपावली के मौके पर इसका औपचारिक उद्घाटन हुआ।
नाम “नमो” उन तीन नमस्ते मुद्रा वाली मूर्तियों से आया है। ये घाट गंगा को स्वच्छ और सुंदर बनाने की मुहीम का हिस्सा है। करीब 76 करोड़ की लागत से बना ये अब वाराणसी का सबसे लंबा घाट है, जो 1.5 किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में फैला है।
विकास की पृष्ठभूमि
ये प्रोजेक्ट गंगा सफाई और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शुरू हुआ। स्थानीय कारीगरों की कला को शामिल किया गया, जो ‘मेक इन इंडिया’ की भावना को दर्शाता है। नतीजा ये हुआ कि वाराणसी में एक नया आकर्षण जुड़ गया, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रहा है। अब यहाँ नौकरियां भी बढ़ी हैं और पर्यटक ज्यादा आने लगे हैं।
नमो घाट की विशेषताएं
वास्तुशिल्प और डिजाइन
नमो घाट का डिजाइन देखते ही बनता है। तीन विशाल नमस्ते हाथों की मूर्तियां यहाँ की शान हैं। पूरा घाट 21,000 वर्ग मीटर से ज्यादा क्षेत्र में फैला है और भारत का सबसे बड़ा घाट माना जाता है। सीढ़ियां चौड़ी और साफ हैं, रैंप भी हैं ताकि बुजुर्ग या दिव्यांग आसानी से नदी तक पहुंच सकें।
उपलब्ध सुविधाएं
यहाँ तुम्हें पार्किंग, कैफेटेरिया, फूड कोर्ट, स्मृति चिन्ह की दुकानें, बच्चों का खेल क्षेत्र – टॉय ट्रेन, जंपिंग जोन – सब मिलेगा। हेलीपैड भी है, जो इसे पानी, जमीन और हवा से पहुंच योग्य बनाता है। फ्लोटिंग सीएनजी स्टेशन, ओपन एयर थिएटर और ग्रीन एरिया भी हैं। सबकुछ इतना व्यवस्थित कि घूमते हुए थकान नहीं लगती।
प्राकृतिक सौंदर्य
गंगा के किनारे बसा नमो घाट सूर्योदय और सूर्यास्त का अद्भुत नजारा पेश करता है। नदी का पानी यहाँ साफ दिखता है और दूर तक सभी घाटों का व्यू मिलता है। शाम को रोशनी में पूरा घाट चमक उठता है। प्रकृति और इंसानी कला का ये मेल तुम्हें बार-बार खींच लाएगा।
नमो घाट पर करने योग्य गतिविधियां
गंगा आरती और नाव की सवारी

नमो घाट पर अब शाम की गंगा आरती भी होती है, जो शांत अनुभव देती है। आरती का समय आमतौर पर सूर्यास्त के बाद होता है, करीब शाम 6-7 बजे के आसपास। यहाँ से नाव लेकर सभी 84 घाटों की सैर करो – ये अनुभव यादगार बन जाएगा।
सांस्कृतिक और मनोरंजन कार्यक्रम
यहाँ योग सत्र, संगीत कार्यक्रम और सांस्कृतिक शो होते रहते हैं। जल क्रीड़ाएं भी शुरू होने वाली हैं। बच्चों के लिए खेल क्षेत्र है, तो परिवार वाले खूब एंजॉय करते हैं।
फोटोग्राफी और स्नान
फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए ये स्वर्ग है – नमस्ते मूर्तियां, गंगा का व्यू, सूर्यास्त। पवित्र स्नान के लिए भी लोग आते हैं। सुबह या शाम का समय सबसे अच्छा।
नमो घाट कैसे पहुंचें
नमो घाट पहुंचना आसान है, क्योंकि यह काशी रेलवे स्टेशन के नजदीक है। पता: नमो घाट, राजघाट, वाराणसी, उत्तर प्रदेश 221001।
सड़क मार्ग से
राष्ट्रीय राजमार्ग NH-2 या NH-7 से जुड़ा हुआ। ऑटो-रिक्शा, टैक्सी या बस से पहुंचें। पार्किंग उपलब्ध है।
ट्रेन से
नजदीकी स्टेशन: काशी रेलवे स्टेशन (सबसे करीब), वाराणसी जंक्शन या मंडुआडीह। स्टेशन से 15-30 मिनट में पहुंचें।
हवाई मार्ग से
लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट (बाबतपुर) से 25-30 किमी दूर। कैब या टुक-टुक से 45-60 मिनट लगते हैं।
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च तक का मौसम बेस्ट है – ठंडक रहती है। सुबह 5-8 बजे सूर्योदय के लिए या शाम 5-8 बजे आरती और सूर्यास्त के लिए आओ। घाट सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है।
नमो घाट के निकट दर्शनीय स्थल
अन्य घाट
यहाँ से अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट आसानी से पहुंच सकते हो। नाव से तो सभी घाटों की यात्रा कर लो। राजघाट और आदि केशव घाट बहुत करीब हैं।
मंदिर और अन्य आकर्षण
काशी विश्वनाथ मंदिर, संकट मोचन हनुमान मंदिर थोड़ी दूर हैं। सारनाथ और रामनगर किला भी घूमने लायक। वाराणसी की पूरी संस्कृति यहाँ से एक्सप्लोर करो।
F.A.Q (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
नमो घाट कहां स्थित है?
ये वाराणसी के राजघाट क्षेत्र में गंगा के तट पर है, शहर के उत्तरी हिस्से में।
नमो घाट का प्रवेश शुल्क क्या है?
कोई प्रवेश शुल्क नहीं है, ये पूरी तरह फ्री है।
नमो घाट पर गंगा आरती कब होती है?
शाम को सूर्यास्त के बाद, आमतौर पर 6-7 बजे के बीच। सटीक समय मौसम पर निर्भर करता है।
क्या नमो घाट परिवार के साथ घूमने के लिए उपयुक्त है?
बिल्कुल! बच्चों के खेल क्षेत्र, साफ-सफाई और शांति के कारण परिवार के लिए परफेक्ट।
नमो घाट से निकटतम रेलवे स्टेशन कौन सा है?
वाराणसी जंक्शन (कैंट स्टेशन), करीब 8-10 किमी दूर।
समापन
वाराणसी की यात्रा अधूरी सी लगती है अगर तुम नमो घाट नहीं गए। ये घाट पुरानी परंपराओं और नई सुविधाओं का सुंदर मेल है, जहाँ गंगा की शांति तुम्हें छू जाएगी। सूर्यास्त देखो, आरती में शामिल हो या बस नदी किनारे बैठकर सुकून लो – हर पल यादगार बनेगा।